साहित्य

जब भी,मन उदास होता

डॉ रामशंकर चंचल

जब भी मन
उदास होता हैं
बहुत ही देर तक
एक अजीब , खालीपन
का अहसास लिए
दिल बहुत उदास हो
जाता है और सब कुछ
होते हुए भी तुम्हारी
कमी से भर जाता है
तब केवल यही वो
शांत और सुकून देती
तुम्हारे अहसास को
जिंदा रखती प्रकृति होती हैं
जिसे देख , तुम्हारी उपस्थिति को
पाता हूं, इन खुशनुमा पेड़ों के
हरे भरे पत्तों में
खुले आसमां में
हल्की हवाओं में
तुम्हारे अहसास और
जी जाता हूं तुम्हारे संग
कुछ पल समेटे
एक अद्भुत ऊर्जा बटोर
चल देता हूं वापस
रोग के किरदार निभाने
घर वापस
सोचता हूं ,कैसा जीवन है
सोचता हूं, यदि यह अहसास
का सहारा भी नहीं होता तो
कितना मुश्किल हो जाती
इतनी लंबी उम्र को
जीना और बहुत कुछ
करें गुजरते, सार्थक कर जाना
धन्य है यह पावन पवित्र
धरा , खुशनुमा,जीवंत,सजीव
ईश्वरीय रूप प्रकृति
जो मुझे जेसे अकेले इंसान के लिए
वरदान है जो ,जिन्दा रखें
सक्रिय रखें सालों से
साथ दे रही हैं
सत् सत् प्रणाम ईश्वर रूप
प्रकृति को, इसके अथाह प्यार और
अपनेपन को जो सदा
हर हाल में मेरा ख्याल रखते
साथ देती है
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश

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