साहित्य

विश्वविजय भारत

दिनेश पाल सिंह 'दिव्य'

आज गगन भी झूम रहा है,
धरती गा रही विजय गान।
भारत के रणबांकुरों ने लिख दी,
क्रिकेट में गौरव की पहचान।।

जब उतरी भारत की टोली,
जोश भरा हर एक प्रहार।
चौकों–छक्कों की वर्षा से
काँप उठा सारा संसार।।

क्रीज़ बनी थी रण की धरती,
हर खिलाड़ी था वीर जवान।
साहस, धैर्य और परिश्रम से
जीत लिया फिर विश्व मैदान।।

जब गेंदबाज़ मैदान में आए,
बनकर बिजली, बनकर आग।
हर गेंद में ऐसा जादू था,
डगमगाने लगा विरोधी भाग।।

देख तिरंगा ऊँचा लहराया,
गूँज उठी जय-जय की तान।
भारत माँ के वीर सपूतों,
तुम पर करता जग अभिमान।।

“दिव्य” कहे यह जीत हमारी
सिर्फ खेल की बात नहीं।
यह भारत की शौर्य गाथा है,
जिसकी कोई मात नहीं।।

*दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’*
*जनपद संभल उत्तर प्रदेश*

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