साहित्य

ग़ज़ल

वाई. वेद प्रकाश

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई।
एक कहां रह पाये भाई।
शहर – शहर में गांव – गांव में,
जाने किसने आग लगाई।
आग उगलती निकली लपटें,
दसों दिशा फैली दुःखदाई।
जाति धर्म ही जीते हैं सब,
सत्य अहिंसा गयी भलाई।
पागलपन फैला है जग में,
जिसने सबकी नींद उड़ाई।
हुआ हताहत सारा जन – मन,
संघर्षों में हातिमताई।
अब तक समझ नहीं आ पाया,
नफ़रत है किसने फैलाई।

वाई.वेद प्रकाश
द्वारा विद्या रमण फाउंडेशन
शंकर नगर, मुराई बाग, डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207
9670040890

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!