साहित्य

माता (कुण्डलिया छंद)

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

माता तेरी छाँव में, मिल रहा सुख अपार।

तेरी ममता से सजे, सुखी सदा संसार।।

सुखी सदा संसार, कृपा मात की बरसती,

दुख के घन सब छँटें, ज्योति मन भीतर हँसती।

‘सुमन ‘करे अरदास, शीश चरण में झुकाता,

मिट जाए हर क्लेश, सुमिरन कर रहे माता ।।

 

माता तेरी भक्ति से, मन होता निष्काम।

तेरे नाम जपें सदा, मिल जाए विश्राम।।

मिल जाए विश्राम, प्रेम की धारा बहती,

तेरी दया न बरस, कौन पीरा यह सहती।

कहे ‘सुमन’कविराय ,जगत तभी जगमगाता,

पाती तेरी शरण, मिले तू साक्षात् माता।।

 

स्वरचित

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!