
बेकार ऐसा जीना ज़िल्लत की जिन्दगी ये
दुनिया है खूबसूरत इज़्ज़त की जिन्दगी ये
बेदाग देख चहरा मानिंद वो लग रहा है
अच्छी नहीं लगे अब फितरत की जिन्दगी ये
आतप भरे जहाँ में सोये थे सब घरों में
सरहद पे जग रही वो हिम्मत की जिन्दगी ये
मजदूर स्वेद बहता लिखता नसीब अपना
किस्मत गले लगाती शौकत की जिन्दगी ये
गम दर्द ये मिटा दे अब तो जहाँ से मेरे
मिलती नहीं खुशी है दहशत की जिन्दगी ये
कींकर नहीं है बौना कांटे चुभेंगे पग में
महकेगी फूल से ही उल्फत की जिन्दगी ये
तन्हा नहीं रहा दिल दुनियां की भीड़ में भी
अब तो उषा ये गुजरी हसरत की जिन्दगी ये
स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




