
देश में डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ एक ऐसे विरले महान् व्यक्ति कवि और कथाकार है जिनकी रचनाएं पत्रों से बात करती होती हैं और सीधी पाठकों के दिल और दिमाग में बीस जाति हैं,वो कविता लिखते नहीं, कविता उन्हें लिखने के लिए मजबूर कर देती हैं और कभी भी सूत्र हुए उठा कर जन्म लेतीं है, ख़ुद डॉ रामशंकर चंचल को नहीं पता केबी किस समय किस कविता का जन्म होगा
एकदम सहज सरल भाषा शैली में व्यक्त उनकी रचनाओं के हर उम्र के पाठक हैं जो उन्हें बहुत मन से आदर से पढ़ते है , उनकी रचनाओं को समझना बहुत ही आसान होता क्योंकि कि भाषा शैली जटिल शब्दों का भंडार नहीं होता हैं विद्धता, ज्ञान के अहम से कोसों दूर होता हैं और मन आत्मा को झकजोर देता है यही वजह है कि आज देश और दुनिया में छाई हुई है जिसका कारण है सहज सरल भाषा शैली में व्यक्त जीवंत सजीव कविताएं
डॉ रामशंकर चंचल का कहना है कि बात में दम है वजन है तो भाषा शैली के चमत्कार की आवश्यकता नहीं होती हैं, उनकी रचनाओं के कविता हो या कथा प्रायः विषय नवीन होते है जिस पर लिखा नहीं गया या बहुत बहुत कम लिखा गया है यह भी एक प्रमुख कारण है डॉ रामशंकर चंचल की रचनाओं के हजारों हजारों पाठक होना
मौलिकता उनकी रचनाओं की प्रमुख विशेषता है और साथ भाषा शैली की सहजता सरलता यही सब कारण है कि देश और दुनिया में उन्हें सुना जाता है सम्मान से पढ़ा जाता है
दिल और आत्मा की दुनियां में जीता यह सहज सरल व्यकित्व सादगी लिए जीता है और यही सादगी उनकी रचनाओं में दस्तक देती है
सारे देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ ने जो सचमुच ईश्वरीय आशीष है कृपा है
वंदनीय है झाबुआ मध्य प्रदेश आदिवासी जिले की सहज सरल पावन पवित्र धरा जहां डॉ रामशंकर चंचल ने जन्म लिया और धरा का झाबुआ का नाम किया वह भी बहुत आदर और सम्मान से हिंदी भाषा के गरिमामय अस्तित्व को बरकार रखते हुए गर्व महसूस किया
आज यदि देश और दुनिया चौकी हुई है तो कोई आश्चर्य नहीं है जिस आदिवासी जिले झाबुआ में साहित्य की बात करना बैमानी लगती हो वहां से साहित्य की मशाल, पताका सारे देश और दुनिया में फहराना चौकने जैसा ही है



