
आए नहीं बुलाने से जब, छोड़ो न इंतजार करो ।
ठेस लगे क्यों मन को बोलो, पहले खुद से प्यार करो सोच नहीं वह क्या सोचेंगे, बदलो अपनी सोच अभी।
गया समय फिर कब है लौटे,
मन की सुन लो बात कभी।
बीती है उम्र मनाने में ,
और नही मनुहार करो।
ठेस लगे क्यों मन को बोलो, पहले खुद से प्यार करो ।।
मौसम जैसे लोग जगत में, पैसे से है तोल रहे ।
जेब देखकर हाथ बढ़ाते, वरन नीम सम बोल रहे ।
फँसी कही जीवन की गाड़ी, बाधा खुद ही पार करो।
ठेस लगे क्यों मन को बोलो ,पहले खुद से प्यार करो।।
जितना भी कर दो कम ही है ,लोग गिनाते भूल सदा।
गुण अंदर कोई कब झाँके, अवगुण ढूंढे यदा- कदा।
बचो बहस करने से प्यारे , समय नहीं बेकार करो।
ठेस लगे क्यों मन को बोलो ,पहले खुद से प्यार करो।।




