
भाग्य जब भी आपको दुख एवं परेशानी दे उनसे घबराएं नहीं अपितु ,उन दुख एवं परेशानियों नींबू सा समझ उनका शरबत बनाकर पी जाए। अर्थात नींबू की प्रवृत्ति, कुछ कड़वी और कुछ खट्टी दोनों ही होती है। प्रत्येक व्यक्ति को नींबू का स्वाद नहीं भाता ।किंतु दोस्तों …! कहते हैं यदि, उसके प्रयोग और खाने के तरीकों में परिवर्तन कर लिया जाए तो वह जल्द ही सभी को भाने लगता है यानि कि, नींबू को सब्जी सलाद में डाल कर खाएं या फिर उसका अचार बना ले तो, वह स्वादिष्ट लगता है और यदि उसका शर्बत बनाकर पीने से वह,शरीर को फायदा भी करेगा व स्वादिष्ट भी लगेगा साथ ही साथ शीतल तभी प्रदान करेगा।
दोस्तों..! आश्य हमारे भाग्य अनुसार मिलने वाले उन दुखों से है जो,प्रत्येक मनुष्य के जीवन में आते जाते रहते हैं। किसी के भी जीवन में सदैव धूप ही धूप रहे या सदैव छाया ही छाया रहे यह संभव ही नहीं क्योंकि,इससे सृष्टि की प्रकृति गड़बड़ा जाएगी । यदि हम इन दुखों को भी उस नींबू की तरह मानकर चलें,तो ज्यादा सहज अनुभव करेंगे। दुखों का लंबा सफर, छोटा हो जाएगा और जल्दी तय हो जाएगा ।
बस ..! उस समय, धैर्य रखकर आवश्यकता अपने मस्तिष्क रूपी रथ में जुते हुए ,उन घोड़े को काबू कर, दिशा परिवर्तन करने की। यदि एक ही दिशा में उन्हें दौडाए चले जाएंगे, तो घोड़े भी थक जाएंगे और सफर भी लंबा होगा। जैसे नींबू को यदि हम नींबू ही समझ कर उसे सीधा ही खाएंगे तो वह क्या असर करेगा ,कैसा लगेगा खाने में …!
लेकिन ..! यदि इसके विपरीत आपको वह भाने लगा ….! अब जरा सोचिए ..! क्यों…? क्योंकि आपने उसके प्रयोग के तरीके बदल दिए। इसी प्रकार दुख के क्षणों में,भी ना तो स्वयं के ऊपर उस बात को हावी होने दे व नकारात्मक विचारों को तिलांजलि देकर सकारात्मक विचारों का शरबत बनाकर पीते और पिलाते चलें फिर देखिए ….! जीवन आपको सरल सहज और आसान लगी स्वयं प्रेरित को दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बनें।
सियाराम जी की 🙏🌺
#सीमाशर्मा”तमन्ना”✍️
नोएडा उत्तर प्रदेश



