
था जादुई घोड़ा राणा का वो,
हवा से बातें करता था।
उसकी चाल के आगे तो,
हवा भी मद्धिम लगती थी,
राणा की सवारी लेकर वो,
वायु वेग से उड़ता था।
दुश्मन की आँखें खुल न पातीं,
वो आसमान को छूता था।
भला सा ‘चेतक’ नाम था उसका,
वह राणा का मुँह बोला था।
जो मिल जाती थपकी राणा की,
वो सनसनाता उड़ जाता था।
था जादुई घोड़ा राणा का वो,
हवा से बातें करता था।
रचनाकार – सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक सृजन,©® रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर,उत्तराखंड।



