
चाँद में भी दाग़ है, ये कौन नहीं जानता, जनाब,
मगर उस दाग़ को वो कभी छुपाता नहीं, जनाब।
रौशनी फिर भी उसकी सारी दुनिया में फैली है,
कमियों के बावजूद वो कम नहीं होता, जनाब।
बस इतनी ताक़त अपने मिज़ाज में रखिए,
कि सच सामने आए तो घबराइए मत, जनाब।
शख़्सियत ऐसी बनाइए इस जहाँ में,
कि लोग फिर भी दीदार को मजबूर हो जाएँ, जनाब।
कलम: रंजीता निनामा
झाबुआ (म. प्र.) ✨




