
कैसे मैं पागल हो गया तेरे इश्क में,
दिल खो गया जाने कब तेरे इश्क में।
तेरी हँसी की धूप पड़ी जब दिल पर,
खिल उठी मेरी दुनिया तेरे इश्क में।
तेरी बातों में मीठा सा जादू है,
तेरी आँखों में सपनों का काजल है।
जब से तुझको देखा है इस दिल ने,
हर धड़कन में बस तेरा ही आँचल है।
कैसे मैं पागल हो गया तेरे इश्क में,
दिन ढले भी बस तेरा ही जिक्र है।
रातों में चाँद भी पूछे मुझसे,
कौन बसा है तेरे दिल के फिक्र में।
तेरी राहों में दिल ये बिछ जाता है,
तेरे नाम से ही गीत सजाता है।
तेरे संग लगे ये जीवन मेला,
तेरे बिन सब सूना हो जाता है।
कैसे मैं पागल हो गया तेरे इश्क में,
अब तो जीना भी तेरे ही इश्क में।
साथ तेरा मिले अगर उम्र भर,
जन्नत मिल जाए इस छोटे से दिल में।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




