साहित्य

जय हो विमले,कमले,माँ रुद्रे

चन्द्रगुप्त प्रसाद वर्मा "अकिंचन"

जय हो विमले,कमले,माँ रूद्रे,जय हो माते,जगदम्ब भवानी।
जय हो हँस,उलूक,सिंह वाहिनी,जय हो माँ महिषासुर
मर्दिनी।।
जय हो सत् चित् आनन्द रूपिणी,वैभव वर्धिनी,शक्ति
दायिनी।
वीणा वादिनी,टंक निनादिनी,जय हो माते,शंख-ध्वनि
घोषिनी।।
जय हो ज्ञान-विज्ञान दायिनी,संताप हारिणी,दुष्टरोदनी
माँ रुद्रानी।
जय हो माँ तमस हारिणी,ज्योति रूपिणी,जयति माँ
दिव्य लोचनी।।
जय हो मृदुले सुमधुर-भाषिणी,जय हो सरले, सुस्मित
हासिनी।
जय हो दुर्गा,दश प्रहरण धारिणी,असुर संहारिणी,रूद्र
गर्जिनी।।
जय हो विमले,ब्रह्म रूपिणी,जय हो कमले नित विष्णु
अंकिनी।
जय हो सुजले,सुफले,शुचिते,जय हो माँ,शिव-शक्ति-
भवानी।।
कवि जन-हृदि,प्राण-शरीरे वासिनी,कोटि कोटि कवि कंठ निनादिनी।
जय हो विमले,कमले,शुचिते,जय हो माते, जगदम्ब भवानी।। 🚩
🙏चन्द्रगुप्त प्रसाद वर्मा “अकिंचन”

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