
हिंदू नव वर्ष की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई
स्वप्न सुनहरे साथ मे ले,हिन्दू नव वर्ष की बेला आई।
नव प्रभात नव उमंग प्रेम संग,नव संवत की बेला आई।।
तिमिर घनेरा छट गया देखो,दिग दिगंत में हुआ प्रकाश,
पावन हुआ धरा का कण कण,ज्योतिपुंज से भरा आकाश,
भरपूर नई आशाओं से फिर,सूरज की किरणें मुस्काई।
लिये उँजाले हरषाती सी,नव संवत की बेला आयी।।
झूम उठे सब तरुवर नदियाँ, धरती ने फिर किया श्रृंगार,
हरियाली को देख हुआ अब,प्रकृति का सपना साकार,
नव कोपल खिल उठे शाख पर,कलियों ने फिर ली अंगड़ाई।
आधारों पर मुस्कान सजाए,नव संवत की बेला आयी।।
हिन्दू का नव वर्ष अनोखा,शुरू यज्ञ और हवन से होता,
भक्ति में डूबे भक्तों पर,माँ की कृपा का शुभफल होता,
आह्वान देवी का कर,देवों की करते अगुआई।
बांह पसारे इठलाती सी,नव संवत की बेला आयी।।
पुलकित ’पूजा’ का हुआ हृदय,अभिलाषाएं नयी जाग उठी,
नकारात्मक वाली सारी,विपदाएं भी भाग उठी,
करे कामना यही कि सबका,नवल वर्ष हो सुखदायी।
नए लक्ष्य नई आशाएं ले,नव संवत की बेला आयी।।
✍🏻अनुजा दुबे ‘पूजा’
अप्रकाशित/मौलिक©®


