
तेज का भी अपना एक, विशिष्ट तेज होता है
बिल्कुल दिनकर की, रश्मियों की तरह
कोई इस तेज से जग जाता है,
तो कोई जल जाता है
जहाँ एक दृढ़ शख्स इस तेज को, सहन करने की शक्ति रखता है
वहीं कमजोर व्यक्ति इस तेज के आगे निस्तेज होता है ।
हाँ
तेज का भी अपना एक विशिष्ट तेज होता है……
मन की तेजी, निर्मलता के साथ
सूर्य के उजास के समान, अपने पथ को प्रकाशित करती है
अपनी निर्दिष्ट लक्ष्य की ओर अग्रसर होती है
स्वभाव से तेज व्यक्ति, दीपक के समान सभी का पथ आलोकित करता है
और कभी-कभी स्वयं अंधकार को ढोता है
हाँ….
तेज भी अपना तेज होता है……
विनीता चौरासिया
शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश




