
परिवेश से जन्म लेती है कविता
मन के भाव से सजती है कविता
कभी खुलकर मुस्कराती कविता
कभी गम में डुबो देती है कविता
देश से बुराइयां मिटाती कविता
तीज, त्योहार मनाती कविता
हर घटना से रूबरू करवाती है
समाज का आईना है कविता
कल्पनाओं से बनती है कविता
शब्दों की जादूगरी है कविता
मन से नफरत मिटाती कविता
सुसभ्य समाज बनाती कविता
-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
कवि,साहित्यकार
भवानीमंडी राजस्थान



