साहित्य

आंगन की रानी :गौरैया

ललन प्रसाद सिंह

नन्ही सी है जिसकी जान,
आँगन की वह प्यारी शान।

फुदक-फुदक कर दाना खाती,
चीं-चीं कर सबको जगाती।

अब न दिखती वैसी रौनक,
खो गई उसकी मधुर खनक।

आओ मिलकर हाथ बढ़ाएं,
प्यारी गौरैया को बचाएं।

© ललन प्रसाद सिंह
वसंत कुंज, नई दिल्ली-70

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