साहित्य

कमज़ोर कड़ी

डॉ. सारिका ठाकुर 'जागृति'

हर इंसान की ज़िंदगी में
एक कमज़ोर कड़ी होती है
किसी के दिल की मासूमियत
किसी की आँखों की नमी होती है

किसी की अधूरी चाहत
किसी की बिखरी उम्मीदें
किसी के सपनों की थकान
किसी की चुप्पी में छिपी तकलीफ़ें

दुनिया में लोग दो तरह के होते हैं
कुछ जो…
आपकी कमज़ोरियों को समझते हैं
आपके आँसुओं को
अपने कंधों पर रखकर आपको
फिर से जीना सिखाते हैं

और कुछ लोग… ऐसे भी होते हैं
जो… मुस्कान का मुखौटा पहनकर आते हैं
आपकी उसी कमज़ोर कड़ी को
अपनी ताक़त बनाकर चले जाते हैं

लेकिन सच तो यह है कि…
कमज़ोर कड़ी होना
कमज़ोर होना नहीं है
क्योंकि… जहाँ दर्द होता है
वहीं इंसानियत जन्म लेती है

और याद रखिए
जिस दिल में संवेदना बची है
वही दिल सच में ज़िंदा है
जिसकी आँखों में
किसी के लिए नमी है
वही इंसान ज़िंदा है

इसलिए अपनी कमज़ोरियों से
कभी डरना नहीं चाहिए
क्योंकि…
जब सच्चे लोग साथ खड़े होते हैं
तो कमज़ोर कड़ियाँ भी
इतनी मज़बूत हो जाती हैं कि…
ज़िंदगी की सबसे बड़ी
मजबूत ज़ंजीर बन जाती हैं

और तब, कोई भी
आपको तोड़ नहीं पाता
बल्कि आपकी वही कमज़ोरी आपकी सबसे बड़ी ताक़त बन जाती है

©® डॉ. सारिका ठाकुर ‘जागृति’
ग्वालियर (मध्य प्रदेश )

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!