
1-शब्द ढल काव्य बनाते ,
लय ताल संग ,
तुम्हारे लिए ।
2-कविता भाव सरिता सी,
बहती जाती अविरल ,
तुम्हारे लिए ।
3-रस छंदो से सजती,
मर्म वेदना कहती,
तुम्हारे लिए ।
4-शब्दों का सुंदर मेल,
भावों का खेल।
तुम्हारे लिए
5-कल्पनाओं के पंख लगाकर,
उड़ती नभ में ,
तुम्हारे लिए ।
6-सत्य शिवम सुंदरम रूप,
है ईश्वरीय स्वरूप,
तुम्हारे लिए ।
7-मानस का निर्मल मोती,
छंदबद्ध कविता होती,
तुम्हारे लिए ।
8-दुख में धीर बंधाती,
सुख में सम्मान,
तुम्हारे लिए ।
9-कविता ही जीवन सार,
यह जगत आधार,
तुम्हारे लिए ।
10-कविता कवि की प्रेमिका,
रहती हरपल साथ,
तुम्हारे लिए।
डॉ स्वाति पांडेय ‘ प्रीत ‘
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी
साहित्य साधक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान लखनऊ
72 ,काशीनगर लखीमपुर-खीरी



