साहित्य

राजस्थान दिवस पर सृजित गीतिका – झाँकी राजस्थान की

लक्ष्मण लड़ीवाला 'रामानुज'

देख चकित होते सैलानी झाँकी राजस्थान की ।
पावन धरती जानी जाती वीरों के अभिमान की।

राणा और शिवा के वंशज देते हैं कुर्बानियाँ
पन्ना धाय यहाँ कुर्बानी कर देती सन्तान की

राजाओं का प्रांत देश में राजपुताना नाम है
आज सभी हम गाथा जाने,जयपुर के सम्मान की

अस्सी घाव लिए भी लड़ते राणा सांगा नाम था
देख अस्मिता को खतरे में। नहीं फिक्र थी जान की

शीश काट रानी हाड़ा ने कायम एक मिसाल की
जोश दिलाना था राणा को रक्षा करने आन की

चप्पा-चप्पा इस धरती का भरा हुआ है शौर्य से,
अमर सिंह गोरा बादल की गाथा वीर महान की।।

शस्य शामला धरती माता देती हमको सम्पदा
मोटा अन्न धरा उपजाए बहुत जरूरत धान की ।

दुनिया माने आज मिलेट्स में गुणवत्ता भरपूर है
अद्भुत अन्न अवनि से अपने, जय जय करे किसान की ।

– लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’ जयपुर
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आधार-प्रदीप छन्द 16-13 मात्राए

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