साहित्य

वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच की मासिक गोष्ठी ऑफलाइन संपन्न

वरिष्ठ नागरिक काव्यमंच कर्नाटक इकाई की मार्च माह की काव्य गोष्ठी परम आदरणीय संस्थापक श्री नरेश नाज जी के  आशीर्वाद से रामस्वरूप कुशवाह के निज निवास पर सौहार्द पूर्ण रूप से सम्पन्न हुई।  जिसमें मुख्य अतिथि  के रूप में आदरणीय श्री कुंअर प्रवल प्रताप सिंह राणा जी
प्रहरी काव्य मंच- वन कोम के उपाध्यक्ष कर्नाटक इकाई।
विशिष्ट अतिथि:-  श्री राजेश कुमार जैन राही जी
वरिष्ठ कवि गीत कार
अध्यक्ष:-श्री रामस्वरूप कुशवाह जी अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक काव्यमंच कर्नाटक ईकाई
गोष्ठी अध्यक्षता:-डा॰ कोमल प्रसाद जी
वरिष्ठ कवि साहित्यकार
संचालन:-  श्रीमती अनीता कुमारी जी उपाध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच कर्नाटक इकाई
उनकी  उपस्थिति में काव्य गोष्ठी सम्पन्न हुई।
काव्य गोष्ठी का विषय था:-अध्यात्म
मंच संचालन श्रीमती अनीता कुमारी जी    ने अपने चिर परिचित अन्दाज में बखूबी निभाते हुए अपनी कविता पाठ से भी मंत्र मुग्ध कर दिया।।
काव्य गोष्ठी की शुरूआत श्रीमती प्रीति राही जी ने सरस्वती वंदना से की बोल थे, सरस सुंदर श्रेष्ठ आसन,
मन हो निर्मल।और  अपने कविता पाठ में बहुत ही सुन्दर कविता पढ़ी जिसके बोल थे, लाल लाल मैया जी का चोला । हो लाल लेके आए हैं, गोपाल लेके आए हैं।।
सीधा दिल में उतर गई। ऐसा प्रतीत होता था । जैसे हम सभी माता रानी केश्री राहीं राज़ ने अपनी कविता में भूख की कीमत हमें मालूम है ‌।हम जिस से दोस्ती करते हैं।।दिल से निभाते हैं। ऐसा लगता था जैसे हम अपने परम मित्र से मिल रहे हो और वो सामने से कह रहे हो।
अभी मंच पर आई बहिन अरूणा राणा जी ने अपनी कविता पाठ में कहा कि
नाम तुम्हारा मैया, इस जीवन का आधार ।
तेरी कृपा से चलता है मैया,ऐ सारा संसार।।
दूसरी कविता में कहा आ जाओ श्री राधे
अभी मंच पर उपस्थित है अनीता कुमारी जी अपनी कविता में कहा,उदासी का नकाब लगाया न करो। तुम सदा मुस्कुराया करों।।
कहने को तो मेरे ही रहे आप, दिल से किनारा कर लिया ।
साथ में होते हुए भी, हमें अकेला कर दिया।।
कशिश क्या होती है, चुलबुली खताओं से किनारा कर दिया।
अपनी कविता में कह रही है, तुम सोचते हो मैं मशरूख रहती हूं किसी उलझन के साथ।
अभी मंच पर आई है फूलबाई कुशवाह पहली बार इस मंच पर अपनी पसंद का गीत गाया बोल थे। सतगुरु मेरे, कलम हाथ तेरे। कि सोने सोने गीत लिखदे।
बाल कवि अनुराग रागी इन्होंने अपनी आवाज में गीत गाया जिसके बोल थे। हमें दो भक्ति का दान, सतगुरु माता जी सबका करो कल्याण सतगुरु माता जी।
ने अपना गीत से सबको चकित कर दिया।। सूबेदार रामस्वरूप कुशवाह अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच कर्नाटक ईकाई ने भी अपनी कविता एक गुत्थी
कौन हूं मैं
एक गुत्थी को सुलझाने में,बीते जन्म हजार।
गुत्थी जैसी की वैसी, मिला न कोई आधार।।
कौन हूं मैं कौन हूं मैं का,सुना बहुत प्रचार।
पर कोई समझा न पाया,झूठा था प्रचार।।
अभी मंच पर है  कवयित्री लेखिका आकाश वाणी आसाम की उद्घोषिका श्री मती मधु महेश्वरी जी
पिता मेरा विशाल आकाश
मां हैं मेरी धरा सुहानी, पिता मेरा विशाल आकाश। मां हैं मेरे कदम धर पर, पिता है मेरी लंबी उड़ान।
मां ने दिए शब्द मुझको, पिता है शब्दों भरी किताब।जीवन के अहंकार मिटाए ,पिता है वो रोशन सा चिराग।
अभी मंच पर आज के मुख्य अतिथि कुंअर प्रवल प्रताप सिंह राणा जी अपनी कविता मां की ममता का कोई मोल नहीं।बिना मां के सब कुछ बेकार लगता है। गीत के बोल थे,मां तूने बुला लिया है, चरणों में अब बिठा ले।
अब मंच पर रायपुर छत्तीसगढ़ से आये कवि आज के विशिष्ट अतिथि श्री राजेश कुमार जैन गोकुल की गलियों में तुम को पुकारें।।तुम्हारी गली में तुम्हारे सहारे। बहुत भीड़ कान्हा नहीं कोई अपना। तुम्हारे दर्शन का रखा एक सपना।
अब मंच पर है रायपुर छत्तीसगढ़ से पधारे आज की कवि गोष्ठी के अध्यक्ष   डा॰कोमल प्रसाद राठोड़ जी। अपनी कविता में कह रहे हैं दीवारें।। अपनी आगोश में सुला लेती है दीवारें ,अच्छे अच्छों की हंसी को रुला देती है दीवारें ।।
इन पर जो पड़ती है धूप छांव, तो समय भी बता देती हैं दीवारें।होती है बातें जो अपने परायों के बीच। बात को उस पर तक पहुंचा देती है दीवारें ।।
रामस्वरूप कुशवाह जी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ भक्तिरस से सराबोर यह काव्यगोष्ठी संपन्न हुई।

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