
अप्रैल आया शुभ समाचार लाया,
हंसी-ठिठोली का मौसम साथ में लाया।
अप्रैल फूल में सबको उल्लू बनाया,
पर दिल से किसी का दिल न दुखाया।
किसी ने कहा—“आज छुट्टी है भाई!”,
स्कूल पहुँचे तो निकली सच्चाई।
कहीं चाय में नमक मिला दिया गया,
कहीं मीठा बोलकर मिर्च खिला दिया गया।
माँ बोली—“तेरा रिज़ल्ट आ गया!”,
सुनते ही दिल धक-धक करने लगा।
फिर हँसकर बोली—“अरे अप्रैल फूल!”,
चेहरे पर आ गई मुस्कान की कूल।
दोस्तों ने भी खूब खेल दिखाया,
झूठा किस्सा सुनाकर खूब हँसाया।
कोई बोला—“तेरा फोन गिर गया!”,
पीछे मुड़ते ही सबने ठहाका लगाया।
हँसी के ये पल बड़े प्यारे लगते,
तनाव के बादल खुद ही हटते।
अप्रैल का दिन बस यही सिखाता—
हँसते रहो, हर ग़म भूल जाता।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश



