साहित्य

विवाह -एक प्रेम बंधन

प्रिया काम्बोज प्रिया

ऐसा वैसा नहीं है ये बंधन
ये बंधन है सात जन्मों का
दो लोगों का जीवन भर साथ निभाने का
सम्पूर्ण रूप से एक दूजे का हो जाने का

ये बंधन है दो परिवारों का
दो घरों के मिलन का
सभ्यताओं का , संस्कारों का

ये बंधन है प्रकृति और पुरुष का
दो आत्माओं का ,दो जीवों का
जो समर्पित करते हैं खुद एक दूजे के लिए

विवाह बंधन नहीं कोई मामूली सा काले मोतियों से बंधा धागा
ये वो रिश्ता है जो एक एक मोती में समेटे प्रेम, समर्पण भाव का

नहीं ये बंधन कोई बच्चों का खेल
जब मन किया तो रहे एक दूजे के संग
और जब मन किया तो थोड़े से मनमुटाव पर हो गये अलग

ये वो पवित्र बंधन है जिसे संस्कारो से सींच कर एक वटवृक्ष तैयार होता है
जिसके प्रेम छाया में पूरा परिवार फलता फूलता है

प्रिया काम्बोज प्रिया ✍🏻 स्वरचित
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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