
हे महावीर! हे बजरंगबली आप
अद्भुत पराक्रमी बुद्धि – ज्ञान के
सागर , आप ही तो है सगुनी-
अनुपमी।
हनुमान जन्मोस्तव पर प्रभु, हमे
भी शक्ति- भक्ति दो, जीवन के
संकट काट कर, राम के मार्ग पर
चलने की राह दो।
भय मुक्त हो,रोग मुक्त हो सदा
रहे आपका आशीर्वाद,हनुमान
जन्मोस्यव पर चहूँ ओर गूंजे
‘जय सियाराम के नाद’।
राम- नाम का जाप कर, आप
ही रक्षक राम दुआरे, भूत-
पिशाच निकट नहिं आवे,
नाम सुनके आपके सारे।
अशोक वाटिका के संताप हरे,
लंजा को पल में जला दिया,
श्री राम के काज सवारे,
राम -काज ही जीवन बना लिया।
सीता जी की खोज में, लांघ
गये सागर अगाथ, ,भक्ति
की ऐसी मिशाल, ना मिला
कोई आप जैसा अगाथ।
संगीता वर्मा
कान्पुर उत्तर प्रदेश




