
मधुर प्रेम धाम की वाटिका ,देखेंगे वृंदावन में,
यमुना जल में गोता पावन, जाएंगे वृंदावन में।
कान्हा जी के चरणों में हम , अर्पित तन -मन कर देंगे,
भाव -अश्रु के पुष्प चढ़ाकर , सुख पाएं वृंदावन में।
बरसाने की गलियों में हम , रंग प्रेम के खेलेंगे,
राधा रानी को पुकार कर,गाएंगे वृंदावन में।
कितना प्यारा वृन्दावन है , जहां कृष्ण राधा बसते,
लीलाओं का सुमिरन करके , गीत लिखें वृंदावन में।
संतों की वाणी से जीवन, अपना यूँ महकाएंगे,
ज्ञान सुधा रस पीकर हम सब,निखरेंगे वृंदावन में।
काव्य गोष्ठी का आयोजन , शानदार होगा सुंदर,
रचनाकार पढ़ेंगे कविता , झूमेंगे वृंदावन में।
मन रम जाता है निधिवन में , सदा वहीं रहना चाहे ,
एक अलग दुनिया है सुख की , सुमन बसे वृंदावन में।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




