
उसने तरकीब क्या निकाली है,
रूठे को झट से ही मना ली है।
हर जुबा पर है नाम उसका ही ,
खास पहचान जो बना ली है ।
एक पल भी जिया नहीं जाता,
नींद बेरहम ने उड़ा ली है ।
मार महंगाई का दिखे घर- घर ,
भोजन की थाली आज खाली है ।
है खुशी लोग से न की पैसा,
लोभ के चश्मे को हटा ली है।




