
निर्जला एकादशी पावन दिन, तप का उजियारा।
भक्ति सुधा में भीग रहा, मन है हमारा।
गंगा सा निर्मल बने, अंतर का सागर।
हरि नाम जपे नित हृदय, मिटे अंधियारा।
जल त्याग कर साधना, दृढ़ संकल्पों की।
आत्मा को मिलती यहाँ, शक्ति अपारा।
दीन-दुखी के कष्ट हरें, दान-पुण्य कर।
करुणा से भरता रहे, जीवन सारा।
विष्णु चरणों में झुके, श्रद्धा का दीपक।
सत्य मार्ग दिखलाता है, भाव तुम्हारा।
मन के विकारों को हर, निर्मलता लाए।
सद्गुण से सजता रहे, जीवन धारा।
एकादशी का यह व्रत, मोक्ष द्वार खोले।
हरि कृपा बरसती रहे, जग उजियारा।
आस्था का दीप जले, मन हो उजियारा।
हरि स्मरण से कट जाए, दुःख का धारा।
व्रत की शक्ति दे हमें, संयम का गहना।
जीवन में भर दे सदा, सुख का धारा।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




