साहित्य

मुझे मिल गया मन का मीत

मुकेश कुमार दीक्षित 'शिवांश'

मुझे मिल गया मन का मीत
हुई मेरी जीत,
जगी मेरी प्रीत
कि मन मेरा खिल सा गया ।

मुझे मिला प्रेम संगीत
प्रणय वाला गीत,
अजब सी यह रीत
कि मन मेरा खिल सा गया ।

हुआ कारज बड़ा पुनीत
नहीं कोई भीत
देख ऐसी नीत
कि मन मेरा खिल सा गया ।

मुझे हो रहा अब प्रतीत
कुसंग गई बीत,
हुआ मैं विनीत
कि मन मेरा खिल सा गया ।

अब ठाढ़े निकट गोतीत
भूला सब अतीत,
देखे जब अजीत
कि मन मेरा खिल सा गया ।

मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’
चंदोसी
मो०- 8433013409

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