साहित्य

बचपन की कहानियां

प्रिया काम्बोज प्रिया

बचपन की वो अजब गजब कहानियां
ख्याल आते ही मन में छा जाती है जवानियां

वो अल्हड़ मस्ती में हो करते थे जब मस्ती
बड़े हो गये पता चला वो नहीं थी वो सस्ती

अब क्या ही बताएं वो बचपन की कहानी
कुछ खट्टी कुछ मीठी यादें वो पुरानी

मन आज भी बच्चा बन जाता है
जब वो बचपन दिल में उतर आता है

गुड्डे गुडिया कागज की कश्ती चूरन की गोली
पड़ोसी आंटी को तंग करना बना करके टोली

मिट्टी के लिए में मोम पिघलाना
साईकिल के पहिये को डंडे से घुमाना

ना जाने ऐसी कितनी ही बातें
वो बीता बचपन और उसकी यादें

कुछ पंक्तियों में ना सिमट पायेगा वो जमाना
मां का आंचल दोस्तों की यारी हंसता झूमता वो बचपन सुहाना

प्रिया काम्बोज प्रिया
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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