
पर्यावरण आज करे गुहार
मत करो उस पर अत्याचार
जल, थल , अग्नि, वायु, आकाश
पंचतत्वों का न करो व्यर्थ संहार ।।
वर्तमान में सारे पंचतत्व मानव ने
निज हित में प्रदूषित कर डाले
संसाधनों का किया अंधाधुंध दोहन
वरदान को अभिशाप में बदल डाले।।
वर्तमान में वक़्त ने मानव को
अनमोल सबक़ ये सिखा दिया
प्राणवायु के लिए भी तरस जाओगे
अगर पर्यावरण को विषाक्त किया।।
पर्यावरण सहेजने के लिए
जन जन को सजग होना होगा
शुद्ध पर्यावरण है जीवन का आधार
यह मंत्र समझ,संरक्षण करना होगा।।
व्यक्तिगत अभ्यासों से ही
जन जागृति का प्रयास करो
कायाकल्प अवश्य होगा धरोहरों का
मन में अटूट विश्वास रखो।।
सुमन बिष्ट, नोएडा




