
आदिकाल से पृथ्वी माँ को पूजते
देती चराचर को शरण
अन्नपूर्णा बन कर करे पालन
स्वार्थ में इंसान ने भू का किया
चीरहरण
दर्द सिसक रही है माँ
आग से तप रही धरा
ग्लोबल वार्मिंग से दरारें पड़ी
नल में पानी गायब
कुँओं , बाबड़ी , नदिया सूख रहीं
जल के बिना कल नहीं
पौध लगाके भू बचाएँ
पृथ्वी दिवस मनाएँ
पृथ्वी दिवस पर पौधा लगाएँ
विदा होने से पहले
कर्ज हवा भू जल मृदा अग्नि का निभाके जाएँ ।
सौ दवा एक हवा
पौधे दें शुद्ध हवा
तभी परिस्थितिकी तंत्र सुरक्षित
तभी पृथ्वी माँ रक्षित
पौध लगाके भू बचाएँ
पौध लगाके भू बचाएँ
पर्यावण दिवस मनाएँ
पर्यावरण दिवस पर पौधा लगाएँ
कर्ज हवा भू जल मृदा अग्नि का निभाके जाएँ ।
सौ दवा एक हवा
पौधे दें शुद्ध हवा।
मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई।




