साहित्य

विश्व पर्यावरण दिवस

 डॉ. संजीदा खानम

पाँच जून का दिन आया है,

धरती को बचाने का प्रण लाया है,

पर्यावरण दिवस मनाते हैं,

प्रकृति का मान बढ़ाते हैं।

 

सूखे पेड़ों को पानी दें,

उजड़े वन फिर से आबाद करें,

चिड़ियों के लिए दाना रखें,

नदियों को निर्मल बनाए रखें।

 

हवा में जहर घुल रहा है,

प्लास्टिक धरती निगल रहा है,

अब तो जागो मेरे भाई,

वरना होगी बहुत तबाही।

 

साइकिल चलाओ,पैदल जाओ,

धुएँ को तुम कम करते जाओ,

थैला कपड़े का अपनाओ

धरती माँ को स्वर्ग बनाओ।

 

ये धरती अपनी अमानत है,

आने वाले दिनों की सौगात है,

आओ मिलकर कसम उठाएँ,

पर्यावरण को बचाएँ।

 

मौलिक, स्वरचित

डॉ. संजीदा खानम शाहीन

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