
शब्दों में बसा है युगों का सार,
शास्त्र हैं मानवता का आधार।
अनुभव अग्नि में तपकर निकले।
सत्य के दीपक बनकर दिखले।
धर्म, नीति, विज्ञान की धारा,
इनमें बहता जीवन सारा।
अंधकार में जो राह दिखाए।
भटके मन को सत्य सिखाए।
ऋषियों की तप की यह थाती,
हर पीढ़ी को राह बताती।
ऋग्वेद की वाणी सत्य पुकारे।
यजुर्वेद कर्म-पथ सँवारे।
सामवेद में संगीत उजियारा,
अथर्ववेद जीवन का सहारा।
रामायण दे मर्यादा का मान।
महाभारत सिखाए धर्म का ज्ञान।
गीता का उपदेश अमर प्रकाश।
भक्ति-पुराण करें मन उजास।
जो शास्त्रों का मर्म अपनाए।
उसका जीवन दीप बन जाए।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




