साहित्य

विश्व पृथ्वी दिवस

सौ, भावना मोहन विधानी

चलो आज हम सब मिलकर विश्व पृथ्वी दिवस मनाएं,
अपनी वसुंधरा को हरे भरे पेड़ पौधों के गहनों से सजाएं।
पेड़ों को काटते जाएंगे तो परिंदों को शुद्ध हवा कहां से मिलेगी?
बिना प्राकृतिक संसाधनों के हमारे जीवन की बगिया कैसे खिलेगी?

सारी मानव जाति का कर्तव्य है कि वह पृथ्वी की रक्षा करें,
हर तरफ हरे भरे पेड़ लगाकर पृथ्वी का आंचल खुशियों से भरे।
प्राकृतिक संसाधनों का जीवन में समझदारी से करें उपयोग,
तभी हमारे जीवन में बनेंगे खुशियों के योग।

आधुनिकता और आविष्कार के नाम पर कब तक पेड़ों की बली चढ़ाएंगे?
आओ मिलकर शपथ ले कि हम पृथ्वी को हरियाली से सजाएंगे।
नदियां हवा और पेड़ यह हमारे प्राकृतिक संसाधन हमें बचाने है,
पर्यावरण संरक्षण का सारा भार अब हमें अपने कंधों पर उठाने हैं।

जितना हो सके पानी को कभी भी व्यर्थ ने बहने दें,
ढेर सारे पौधे लगाकर हवा को खुशी से इठलाने दें।
वसुंधरा जब हरी चुनर ओढ़ कर खुशी से मुस्कुराएगी,
तभी हमारे जीवन में सुख शांति और ढेर सारी खुशियां आएगी।

सौ, भावना मोहन विधानी
अमरावती महाराष्ट्र।

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