साहित्य

हरियर पर्यावरण बनायें

ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति

पृथ्वी माँ के हैं हम बच्चे l
सुन्दर – सीधे – सादे – सच्चे ll टेक

पृथ्वी माँ को नमन करें हम l
पाप शाप का शमन करें हम ll
माता का आशीष लिये हम –
बन जाते हैं सबसे अच्छे ll
पृथ्वी माँ के हैं हम बच्चे l
सुन्दर – सीधे – सादे – सच्चे ll

वर्षा ऋतु में पौध लगाते l
बड़े पेड़ वे सब बन जाते ll
हरी – भरी पृथ्वी माँ होती –
देती खुशियों के बहु’ लच्चे ll
पृथ्वी माँ के हैं हम बच्चे l
सुन्दर – सीधे – सादे – सच्चे ll

हरे पेड़ हम नहीं काटते l
किसी तरह हम नहीं बाँटते ll
लालच में पड़ जितने काटे –
हाय ! बने वे लॅगड़े – लुच्चे ll
पृथ्वी माँ के हैं हम बच्चे l
सुन्दर – सीधे – सादे – सच्चे ll

प्राणवायु पेड़ों से मिलता l
तभी देश का अंतस खिलता ll
और तभी सब सुन्दर बनकर –
कभी नहीं हैं खाते गच्चे ll
पृथ्वी माँ के हैं हम बच्चे l
सुन्दर – सीधे – सादे – सच्चे ll

पौध लगा इतिहास रचायें l
हरियर पर्यावरण बनायें ll
हरे फूल फल पत्ते सब्जी –
‘ईश्वर’ खायें हर दिन कच्चे ll
पृथ्वी माँ के हैं हम बच्चे l
सुन्दर – सीधे – सादे – सच्चे ll

ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति, मेंहदावल,जिला. संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश)

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