साहित्य

लघु कथा आओ,रूह से मिलता हूं

डॉ रामशंकर चंचल

राग द्वेश जाति धर्म राजनीति ऊंच नीच अमीर गरीब आदि सैकड़ों सड़ी मानसिकता में जी रही दुनिया में जब कोई एक भी इन सब से कोसों दूर मिलता है तो ईश्वर रूप है और यदि वह आपके साथ है पास है तो ईश्वर कृपा आशीष है परम् सत्य है
मेरे नसीब है ईश्वर ने मुझे जिंदा रखने के लिए ऐसी ही देवत्व रुह से मिलाया जो सचमुच बहुत सहज सरल और पावन पवित्र आत्मा लिए है कोई चाह नहीं कोई इच्छा नहीं बस जिन है और कुछ अच्छा करते हुए मानव मात्र को सकारात्मक सोच और चिंतन लिए प्रेरणा देते हुए अपने कर्म पथ पर दस्तक दे अपनों के लिए जीना
कहां है आज के समय ऐसी पवित्र आत्मा जो सदा ही दूसरे के लिए हितकारी हो सदा मानव कल्याण सोच लिए जी सुकून महसूस करे

सचमुच ईश्वर ने मुझे मेरी रूह से आत्मा से मिला एक अजीब सुख सुकून और जीने का हौसला दिया

सोचता हूं अक्सर यदि मानव मात्र सभी मानव मात्र के प्रति निश्छल प्रेम करते हुए सभी के लिए हितकारी हो जिए और सभी प्राणियों का कल्याण सोच कर चले तो सचमुच दुनिया बेहद सुंदर और खूब सूरत होती

इसी लिए रूह को ईश्वरीय शक्ति ईश्वरीय कृपा माना गया है जो सदा साथ हो सदा ही आपको अच्छे कर्म पर चलने को प्रेरी करती है और आप सदैव स्वस्थ प्रसन्न हो जीने में लगे रहो है
जब कोई चाह इच्छा नहीं तुम जीवन वैसे ही सहज सरल और सादगी लिए निर्विकार मन और आत्मा लिए कर्म करते हुए जीने में लगा रहते हैं
यह भी ईश्वरीय रूह कोई मजाक नहीं है जितनी आस्था और आत्मा विश्वास होगी उतना सुख सुकून मिलता है

डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश

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