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स्वाभिमान साहित्यिक मंच द्वारा 44 वां राष्ट्रीय कवि दरबार: एक से बढ़कर एक कविता और ग़ज़ल का अद्भुत संगम रहा

दि ग्राम टुडे न्यूज पोर्टल, पटियाला, दुर्गेश मोहन

पटियाला(पंजाब)। स्वाभिमान साहित्यिक मंच ने पिछले दिनों अपनी 44 वीं ऑनलाइन राष्ट्रीय कवि दरबार का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने अपनी काव्य रचनाओं से आत्म विभोर तो किया ही, लोगों ने भी इन सभी कवियों की उत्कृष्ट कविताऔर ग़ज़लों का रसास्वादन किया l
कार्यक्रम का संयोजन नरेश कुमार आष्टा, पटियाला ने किया, जबकि अध्यक्षता डॉ अनुज प्रभात अररिया (बिहार) ने की। कार्यक्रम का सफल संचालन जागृति गौड़, पटियाला (पंजाब) ने बखूबी संभाला। सर्वप्रथम संचालिका जागृति गौड़ ने दिगंवत पार्श्वगायिका आशा भोंसले को स्मरण करते हुए अपने काव्यों -‘ वो सुरों से अपने, कायनात को महका दें,उनकी आवाज़ की मीठास हर दिल को धड़का दे’ से श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही सभी सम्मानित कवियों ने भी स्व. आशा भोंसले के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
इसके उपरांत राष्ट्रीय कवि दरबार में कई प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं, जिनमें शामिल थे: सिद्धेश्वर, पटना (बिहार) ने ‘ कब तलक करते रहोगे तुम ये छल मुझसे, दोस्ती प्यारी है तो जरा संभल मुझसे। डॉ रशीद गौरी ,सोजत सिटी ( राजस्थान) ने -‘ रंग प्यार का नफरतों में ढल गया कैसे, जो था दिलों में निकल गया कैसे..?’ संतोष पुरी ( नई दिल्ली) ने – ‘युद्ध की विभीषिका है, द्वंद्व चारों ओर है ‘जैसी कविता का पाठ कर युद्ध से उत्पन्न भयावहता को प्रस्तुत किया। संपति चौरे ‘स्वाति’, छत्तीसगढ़, ने – ‘ ऐ जिन्दगी इरादों में कट गई, हमने जिन्हें चाहा, यादों में कट गई ‘ सतोष मालवीय ने – ‘ जीवन एक उलझी नाव सा लगता है, मैं क्या कहूं प्रत्येक पल उवाव सा लगता है ‘ नन्द कुमार आदित्य (पुणे), ने- भगवान परशुराम जयंती पर – हे ! कल्प पुरुष परशुराम पर अपनी प्रस्तुति दी। दिव्यांजलि सोनी ‘दिव्या’ (सागर) मध्य प्रदेश,ने -‘ यादों की स्याही में भर कलम ‘ जैसी ग़ज़ल से समां को बांध दिया। इस प्रकार एक से बढ़कर एक कविता और गजलें प्रस्तुति ने राष्ट्रीय कवि दरबार को ऐतिहासिक बना दिया। और कार्यक्रम के अन्त में अध्यक्ष डॉ अनुज प्रभात ने सभी कवियों की रचनाओं पर अपनी बेवाक टिप्पणी से कवियों में ऊर्जा संचारित करने का सफल प्रयास किया। संचालिका जागृति गौड़ ने भी संचालन के क्रम एक से बढ़कर एक शायरी से लोगों के मन को मोहित कर अपने संचालन को संपुष्ट किया। साथ ही
यह कार्यक्रम स्वाभिमान साहित्य यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारित किया गया, जिससे देशभर के दर्शक इस साहित्यिक आयोजन का हिस्सा बन सके। देखा जाए तो 44 वें राष्ट्रीय कवि दरबार कार्यक्रम कविता और ग़ज़लों का अद्भुत संगम रहा।

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