
रोना है तो रोते रहिए,
हम तो देश के साथ खड़े हैं।
कुछ मुश्किल के बादल आए,
लेकिन हौसले अभी बड़े हैं।
पैट्रोल अगर महँगा है तो,
थोड़ी दूरी पैदल चल लें,
अपनी सुख-सुविधा से ऊपर,
मातृभूमि का मान तो रख लें।
सोना एक बरस न खरीदें,
क्या जीवन रुक जाएगा?
थोड़ा संयम रखने भर से,
क्या भारत झुक जाएगा?
हर बातों में दोष निकालें,
यह कैसी लाचारी है?
अपने घर की आग बुझाना,
सबकी जिम्मेदारी है।
दूसरे देशों की हालत देखो,
कितना संकट भारी है,
फिर भी अपने भारत भू पर,
शांति और खुशहाली है।
जो केवल आलोचना करते,
वे क्या साथ निभाएँगे?
देश कठिन दौरों से गुजरे,
तब ही वीर कहलाएँगे।
हमने ठाना देश प्रथम हो,
बाकी सब फिर बाद में,
भारत माँ की आन रहेगी,
अपने हर संवाद में।
मंहगाई पर शोर मचाना,
बहुत सरल अभियान है,
लेकिन संकट में मुस्काना,
सच्चे जन की पहचान है।
हर मुश्किल में जो धैर्य का दीप जलाएँगे,
अपने सुख से ऊपर राष्ट्रधर्म निभाएँगे।
चाहे कितनी भी आँधियाँ आएँ राहों में,
संग देश के जो रहें,भारतवासी कहलाएँगे।
*दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’*
*जनपद संभल उत्तर प्रदेश*
*सम्पर्क सूत्र 8279709465*




