साहित्य
क्या हिन्दू एक हुआ

क्या हिन्दू एक हुआ, ये प्रश्न गगन में गूँजे,
सोई हुई चेतना अब फिर से जागे, पूँजे।
टूटे हुए मन को फिर से संगठित करना है,
धर्म नहीं, बस धर्म का सच्चा मर्म समझना है।
वेदों की वाणी बोले, उपनिषद् का सार,
सत्य और करुणा से ही हो जीवन साकार।
गीता का संदेश हमें कर्मपथ दिखलाए,
अन्याय के आगे सिर कभी न झुक पाए।
भटके हुए कदमों को दिशा दिखानी होगी,
आपस की दीवारें खुद ही गिरानी होंगी।
भेदभाव की ज्वाला को अब शांत करना है,
मानवता के दीपक से अंधकार हरना है।
जब-जब हम बिखरे हैं, शक्ति हुई कमजोर,
एकता के सूत्र में बंधे तो जीते हर दौर।
उठो सनातन संतानों, पहचानो अपना मान,
एकजुट हो गाओ मिलकर हम हैं भारत की शान।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




