साहित्य

राम प्राणनाथ हमारे

डाॅ सुमन मेहरोत्रा 'सुरभि'

राम-चंद्र हैं जीवन-नभ के,

आशा-दीपक ज्योति महान।

भक्ति-सरिता बहती उर में,

पाकर उनका शुभ वरदान॥

 

मन-मंदिर के देव वही हैं,

श्रद्धा का अनुपम श्रृंगार।

प्रेम-पुष्प बन खिलते क्षण-क्षण,

पाकर उनका स्नेह अपार॥

 

राम-नाम है सुधा-कलश यह,

पीकर मिटते सब संताप।

करुणा-सागर प्रभु की महिमा,

हर लेती जग के अभिशाप॥

 

चरण-कमल हैं मोक्ष-द्वार से,

खुलता जीवन का आलोक।

दया-धरा पर बरसे नित ही,

बनकर सुख का दिव्य अशोक॥

 

राम-सूर्य से जग उजियारा,

तम का होता शीघ्र विनाश।

सत्य-वटवृक्ष की शीतल छाया,

देती मन को नव विश्वास॥

 

सीता-संग शोभित प्रभु ऐसे,

जैसे चंदा संग चाँदनी।

मर्यादा के मेरु शिखर हैं,

जिनसे पावन हुई धरणी॥

 

हनुमत-हृदय के वे स्वामी,

विश्वासों के दृढ़ आधार।

धर्म-ध्वजा बन लहराते हैं,

जन-जन के जीवन-द्वार॥

 

राम प्राणनाथ हमारे हैं,

श्वासों का संगीत अमंद।

भव-सागर की नैया के वे,

बनते हैं सद्गुरु आनंद॥

 

स्वरचित

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर ,बिहार

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