साहित्य

ये वो कहानी है जो मैं कभी कह ना पाया

संगीता वर्मा

रखा है माँ की गोद में सर पर बाप को कभी सीने से लगा नहीं पाया …!!

 

बाप अपने बच्चों के लिए कितना कुछ कर जाते है,

बनते हैं हमारा साया ख़ुद धूप में पड़ जाते हैं …!!

 

बन कर मजदूर करते हैं मेरी हर ख्वाइश पूरी,

करते करते काम हाथों में छाले पड़ जाते है …!!

 

ये तो रही जिंदगी की बात,

वक्त आने पर मौत से भी लड़ जाते है …!!

 

माँ पर तो लिखते हैं सब यहां ,

पर बाप की कीमत कोई बता नहीं सकता …!!

 

मैं अपनी बेबसी कैसे बया करूं ,

मैं चाह कर भी उनको गले लगा नहीं सकता…!!

 

ला कर रख दूँ सारी दुनिया कदमों में ,

तो भी उनके पसीने की कीमत चुका नहीं सकता…!!

 

 

संगीता वर्मा

कानपुर उत्तर प्रदेश

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