
अनमोल उपहार सा जीवन मत उपहास बनाना।
सबको मिलता आम जीवन तुमको है खास बनाना।।
अपना कर्म निभाते चलो फल अवश्य ही मिलेगा।
कर्तव्य धर्म निभाते चलोअच्छा कल अवश्य मिलेगा।।
सबके साथ हो सहयोग मत किसीका परिहास बनाना।
अनमोल उपहार सा जीवन मत उपहास बनाना।।
प्रेम से भरीआँखें श्रद्धा से भरा दिल प्रभु चाहता है।
हर सहयोग में बढ़ाओ हाथ ईश्वर यही बताता है।।
सदैव सद्भावना का ही दिल में अहसास समाना।
अनमोल उपहार सा जीवन मत उपहास बनाना।।
मीठी वाणी व्यवहार दया दुआ समावेश हो जीवन में।
स्वार्थ घृणा राग -द्वेष मत आवेश हो अपने जीवन में।।
कई चेहरे कई दिल का जीवन में मत प्रयास कराना।
अनमोल उपहार सा जीवन मत उपहास बनाना।।
रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।
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