साहित्य

आक्रमण के शिकार निर्दोष बच्चों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस

रंजन सिंह

की सुरक्षा और अधिकारों पर गंभीर चिंतन का अवसर

 

— अधिवक्ता कुमुद रंजन सिंह, पटना उच्च न्यायालय

 

पटना, 4 जून।

 

आक्रमण के शिकार निर्दोष बच्चों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता कुमुद रंजन सिंह ने कहा कि आज बच्चों के विरुद्ध हिंसा केवल युद्ध और आतंकवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि बाल श्रम, बाल विवाह, मानव तस्करी, साइबर शोषण, घरेलू हिंसा और शिक्षा से वंचित होना भी बच्चों पर होने वाले सामाजिक आक्रमण के ही रूप हैं।

 

उन्होंने कहा कि बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे विशाल जनसंख्या वाले राज्यों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और अधिकारों का प्रश्न विशेष महत्व रखता है। बिहार में लगभग 4.7 करोड़ बच्चे निवास करते हैं, जो राज्य की कुल आबादी का लगभग 46 प्रतिशत हैं। गरीबी, सामाजिक असमानता और संसाधनों की कमी के कारण बड़ी संख्या में बच्चे अभी भी विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

 

श्री सिंह ने कहा कि बाल विवाह और बाल श्रम जैसी समस्याएँ बच्चों के विकास एवं उनके मौलिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। विभिन्न अध्ययनों और सरकारी आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि बिहार और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों में बाल विवाह की चुनौती अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। देश में बाल विवाह के मामलों की सर्वाधिक संख्या वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश और बिहार प्रमुख हैं, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

 

उन्होंने कहा कि बच्चों पर होने वाला हर प्रकार का आक्रमण राष्ट्र के भविष्य पर आघात है। यदि कोई बच्चा विद्यालय छोड़कर श्रम करने को विवश है, यदि कोई बालिका कम उम्र में विवाह के लिए बाध्य की जाती है, यदि कोई बच्चा हिंसा या शोषण का शिकार होता है, तो यह केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि सामाजिक और संवैधानिक विफलता भी है।

 

अधिवक्ता श्री सिंह ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा बाल श्रम उन्मूलन एवं बाल संरक्षण के क्षेत्र में अनेक पहलें की गई हैं, जिनमें बाल श्रमिकों के पुनर्वास और ट्रैकिंग की व्यवस्था भी शामिल है। किंतु स्थायी समाधान तभी संभव है जब प्रशासन, न्यायपालिका, सामाजिक संगठन, विद्यालय, अभिभावक और नागरिक समाज संयुक्त रूप से कार्य करें।

 

विशेष रूप से युवाओं, शिक्षकों, अधिवक्ताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए जनजागरूकता अभियान चलाएं तथा बाल विवाह, बाल श्रम एवं बच्चों के विरुद्ध हिंसा की घटनाओं की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

 

संदेश के अंत में मैं कहना चाहता हूं—

 

“किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसके बच्चों की मुस्कान, सुरक्षा और शिक्षा से मापी जाती है। जब तक समाज का अंतिम बच्चा भी भय, शोषण और असुरक्षा से मुक्त नहीं होगा, तब तक विकास की हमारी यात्रा अधूरी रहेगी।”

 

“बचपन को सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान देना केवल दायित्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक ऋण है।”

 

— कुमुद रंजन सिंह

अधिवक्ता, पटना उच्च न्यायालय

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