
जिंदा में आत्मविश्वास खोने से
अहंकार की बातें बोलने से
मूर्खत्व से वाद विवाद करने से
आत्म निग्रह नियंत्रण न होने से
इससे क्रोध दिन ब दिन बढ़ता है।
कुटुंब में नित समस्या बढ़ने से
नित दुखों से सामना करने से
और निर्धन की उलझन बढ़ने से
कार्यरत करने की शक्ति न होने से
मानव जीवन में क्रोध बढ़ता है।
क्रोध एक मानसिक समस्या है
इससे सावधान होना अवश्य है
क्रोध से अपने लक्ष्य अधूरा है
इससे जीवन की स्थिति बेकार है
क्रोध से सावधान होना जरूरी है।
क्रोध से मित्र भी शत्रु बनता है
क्रोध से जीवन नष्ट भ्रष्ट होता है
क्रोध से दिमाग में परेशान होता है
क्रोध से किसी को परवाह नहीं है
क्रोध जीवन सपल नहीं बनता है।
श्रीनिवास एन, आंध्रप्रदेश




