साहित्य

वो गली,वो मकान, दुनिया को, प्रेम प्यार की सही परिभाषा दे गई,डॉ रामशंकर चंचल 

डॉ रामशंकर चंचल 

इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई द्वारा प्रकाशित कृतियों में विश्व पटल पर दस्तक देती अमेज़न पर उपलब्ध कृति वो,गली वो मकान, रूह प्रेम कथाएं है जो सदियों जिंदा रहेगी और आनेवाले समय में युवा पीढ़ी को प्रेरित करते हुए प्यार और प्रेम की सही परिभाषा से परिचय कराती है जो साक्षात ईश्वर अहसास है और बेहद ऊर्जा ताकत देता हुआ नेक कर्म करने को प्रेरित करता हुआ नारी शक्ति का अस्तित्व और उसके आदर और सम्मान को जिंदा रखें प्रेरणा स्रोत कृति है इस सत्य को स्वीकार करना होगा

आज के समय सचमुच वंदनीय हैं वो गली,वो मकान जैसी पावन पवित्र धरा पर रची गई बेहद सार्थक सृजन सुख सुकून देता हुआ बेहिसाब प्यार और अहसास का अथाह समुंदर समेटे हुए मानवीय सोच और चिंतन लिए है

आज देश और विश्व में साहित्य जगत में चर्चा बन गई यह कृति आने से पूर्व ही हजारों हजारों द्वारा सराही गई बधाई दी गई है जो इस बात पर दस्तक देती है कि देस को विश्व को इस अद्भुत अनुपम उपहार का कृति का इंतजार है और होना भी चाहिए यह कोई साधारण कृति नहीं है यह ईश्वरीय रूह शक्ति के अस्तित्व और व्यक्तित्व लिए सालों तक देश और विश्व को रुह प्रेम रूह शक्ति और ईश्वर रूप आत्मा में आत्मा विश्वास पैदा करती है जो यह साबित करती हैं कि प्यार और प्रेम पावन पवित्र सोच और चिंतन है शब्द है जिसका गलत अर्थ सदियों से चला आ रहा है

जिस प्रकार ईश्वर से, मां से, हम बेहद प्यार करते हैं और उन्हें सदा ही वंदन करते हैं ठीक वही प्यार और प्रेम हमें सभी से करना चाहिए तभी देश और दुनिया खुशहाल हो सुकून महसूस कर सकती हैं

 

वंदनीय है,वो गली,वो मकान रूह प्रेम कथाएं जो सजीव, जीवन्त है और हर शब्द शास्वत सत्य है आत्मा से निकल आया ईश्वर आशीष है

 

धन्य धरा झाबुआ आदिवासी पिछड़े अंचल जहां से यह इतिहास रचती साहित्य जगत में अमर रहेगी सदियों कृति का जन्म हुआ धन्य है इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई जिसे यह सुखद शौभाग्य मिला कि देश और दुनिया में सदियों जिंदा रहने वाली कालजयी कृति निकलने का सुखद अवसर मिला

 

सचमुच धन्य है हर पाठक जो इस अद्भुत ईश्वरीय उपहार को पढ़ेगा और सुख सुकून महसूस करेगा

 

 

यह मेरा पूर्ण आत्मा विश्वास है कि यह कृति साहित्य जगत में वो अद्भुत आयाम रचेगी जो सदा आदर और सम्मान से सम्मानित किया जायेगा और बहुत ही आदर से इस कृति को लिया जायेगा क्योंकि मैने कुछ नहीं लिखा है केवल उस ईश्वर कृपा को स्नेह प्यार और आशीष को जो उसने आदेश दिया लिखा है

 

 

डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ मध्य प्रदेश

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