
देख रही हो न
किस कदर कलम दौड़ रही है
सुखद अहसास लिए
जैसे तुम आ गई
और बस अब मेरे पास
साथ दे, सदा की तरह
मेरा ख्याल रखें
मेरी चिंता रखें हो
यही तो था
सदा ही हम दोनों के बीच
यही तो चाहते थे, हम दोनों
चलों देर से ही सही
सही समय पर
सही वक्त पर दस्तक दे
मिला यह स्नेह प्यार और साथ
किसी ईश्वरीय उपहार सा है
जो सदा ही मेरे साथ,पास
रहा और आज फिर
एक बार विश्वास हुआ
रूह प्रेम नहीं मर सकता है
यह सदियों जिंदा रहेगा और
आनेवाले कल को
प्रेम की पावन पवित्र
भूमि पर दस्तक दे
सुकून देता हुआ
बहुत बहुत कुछ
कर गुजरने का
हौसला दे
जीवन सार्थक कर जायेगा
प्रणाम रूह
वंदन सत् सत् वंदन
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश




