
प्लास्टिक दूषित कर रहा, जल- थल बिगड़े आज।
बंजर जैसी भू दिखे, कैसे होगा काज।।
प्लास्टिक गलता है नहीं, उर्वरता हो नष्ट।
भविष्य दुखमय बन रहा, सबको मिलता कष्ट।।
प्लास्टिक के उपयोग की, सोच बदल कर देख।
भारत कितना स्वच्छ है, उपवन नदियाँ लेख।।
पानी बोतल का नहीं, घड़ा स्वच्छ रख नेक।
स्वस्थ सदा तुम भी रहो, करना काम अनेक।।
रक्षा इसकी कीजिये, प्लास्टिक करना बंद।
जल-थल हमें पुकारता, जीवन होता मंद।।
प्लास्टिक भारत मुक्त हो, लेना है संकल्प।
सपना न हकीकत बने, देखो सत्य विकल्प।।
छोटे थैले अब बना, ले जाना बाजार।
पहले जैसे ही लिए, भरकर थैले यार।।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




