साहित्य

ममता और मोह के बीच

सपना कुमारी

शालिनी की शादी को अभी कुछ ही दिन हुए थे। नई दुल्हन बनकर जब वह घर में आई, तो उसकी सुंदरता और मीठी बातों ने सभी का मन मोह लिया। सबसे अधिक मोहित उस पर फिदा था। उसे लगता था कि उसकी जिंदगी की सारी खुशियां अब शालिनी से ही जुड़ी हैं।

शादी के शुरुआती दिनों में मोहित का अधिकतर समय अपनी पत्नी के साथ ही बीतता था। वह उसकी हर छोटी-बड़ी इच्छा पूरी करने की कोशिश करता। शालिनी जो कहती, मोहित बिना किसी सवाल के मान लेता। धीरे-धीरे घर के बाकी लोगों को लगने लगा कि मोहित अब पहले जैसा नहीं रहा।

कुछ महीनों बाद शालिनी ने अलग रहने की बात छेड़ी। उसने मोहित को समझाया कि अलग रहने से उन्हें अधिक स्वतंत्रता मिलेगी और अपनी जिंदगी अपने तरीके से जी पाएंगे। मोहित पहले थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन अंत में पत्नी की बात मान गया। जल्द ही वह अपनी मां और जेठानी से अलग रहने लगा।

समय बीतता गया। अब मोहित का ध्यान केवल अपने छोटे से परिवार और ससुराल वालों पर केंद्रित हो गया था। शालिनी की हर फरमाइश पूरी होती। उसके भाई-बहनों की जरूरतें भी मोहित अपनी जिम्मेदारी समझकर पूरी करता। किसी को मोबाइल चाहिए, किसी की फीस भरनी है, तो किसी को कहीं घूमने जाना है—मोहित बिना कुछ सोचे मदद कर देता।

उधर उसकी मां चुपचाप यह सब देख रही थी। जिस बेटे को उसने कठिन परिस्थितियों में पाला था, वही अब उससे दूर होता जा रहा था। कभी-कभी वह पड़ोसियों के सामने अपना दुख व्यक्त कर देती।

“बहुत मुश्किलों से बड़ा किया था मैंने उसे,” वह भर्राई आवाज में कहती। “दिन-रात मेहनत की, उसकी हर जरूरत पूरी की। लेकिन शादी के बाद जैसे सब बदल गया। अब उसे हमारी याद भी नहीं आती।”

पड़ोसी उन्हें समझाते कि समय के साथ बच्चे अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाते हैं, लेकिन मां का दिल इन बातों को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाता। उसे अपने बेटे की कमी हर दिन महसूस होती थी।

मोहित शायद यह नहीं समझ पा रहा था कि पत्नी का साथ निभाना और माता-पिता का सम्मान करना दोनों ही जरूरी हैं। जीवन में रिश्तों का संतुलन बनाए रखना ही सबसे बड़ी समझदारी होती है। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो किसी न किसी का दिल जरूर टूटता है।

एक तरफ पत्नी का प्रेम था, दूसरी तरफ मां की ममता। दोनों अपने-अपने स्थान पर सच्चे थे। लेकिन इन दोनों के बीच खड़ा मोहित यह तय नहीं कर पा रहा था कि किसका दर्द अधिक बड़ा है।

 

— सपना कुमारी, कोल्हापुर

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