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पुरुषोत्तम मास की सोमवती अमावस्या विधि एवं महत्व

आचार्य धीरज "

इस वर्ष पुरुषोत्तम मास (अधिक ज्येष्ठ) महीने की अमावस्या 15 जून, सोमवार को पड़ रही है। सोमवार के दिन अमावस्या होने के कारण इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सनातन धर्म में इस दिन का अत्यधिक महत्व है।बड़ी संख्या में लोग इस दिन पूजा-पाठ, दान और पितरों का तर्पण करते हैं। इस बार सोमवती अमावस्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि ग्रह- नक्षत्र विशेष शुभ संयोग बना रहे हैं और कई तरह का शुभ योग का निर्माण कर रहे हैं।

 

*अमावस्या तिथि -*

पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 14 जून 2026 रविवार को दिन – 11:18 मि. से शुरू होगी तथा यह तिथि 15 जून 2026 सोमवार को प्रातः – 8:24 मि. तक रहेगी।

उदयातिथि के अनुसार 15 जून सोमवार को ही सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजन किया जाएगा।

 

*ग्रहों की स्थिति रहेगी शुभ -*

 

ज्योतिष गणनाओं के अनुसार इस बार कई बड़े ग्रह अच्छी स्थिति में रहेंगे। चंद्रमा वृष राशि में रहेंगे,जिसे उनकी उच्च राशि माना जाता है। बुध अपनी राशि मिथुन में रहेंगे।गुरु कर्क राशि में और मंगल मेष राशि में उपस्थित रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रह अपनी स्वयं की राशि व अपने उच्च राशि में विद्यमान होने की वजह से यह अमावस्या का दिन विशेष महत्वपूर्ण बन जाता है।

 

*नक्षत्र विशेष-*

*सोमवती अमावस्या के दिन मृगशिरा नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि नामक विशेष शुभ योग भी रहेंगे। इसलिए इस दिन का पूजा,जप और दान-पुण्य इत्यादि के लिए और कई गुना महत्वपूर्ण बन जाता है।

 

*वृक्षों की पूजा करें-*

 

सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने की परंपरा है।पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है। कई महिलाएं इस दिन परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ पीपल की पूजा करती हैं। कई जगहों पर पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करने की भी परंपरा है। इस दिन तुलसी विल्व पत्र, शमी इत्यादि पवित्र वृक्षों की पूजा का भी विशेष महत्व है। संध्या के समय इन वृक्षों के नीचे दीपक जलाने से कई तरह के दोष समाप्त होते हैं, और सुख- सौभाग्य की वृद्धि होती है।

 

*इस दिन पेड़ पौधे लगाने से और उनको संरक्षण देने से भी कई गुना शुभ फलों की प्राप्ति होती है-*

 

*पितरों को याद करने का दिन-*

अमावस्या तिथि को पितरों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों की स्मृति में तर्पण और दान-पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या पर किए गए तर्पण और दान से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। इसी वजह से कई लोग इस दिन नदी या तीर्थ स्थलों पर जाकर पूजा-पाठ करते हैं। इस दिन जल में चुटकी भर काले तिल डालकर पितरों का तर्पण करना चाहिए। और संध्या के समय पितरों के नाम का एक दीपक जलाना चाहिए।

 

*गाय की सेवा-*

इस दिन गौ माता की सेवा का भी विशेष महत्व है इस दिन गाय के निमित्त दान करें उन्हें चारा इत्यादि उपलब्ध करवाएं। और पशु पक्षियों के लिए दाना- पानी की व्यवस्था करें।

 

*नाम जप जरूर करें-*

 

हर साल अमावस्या आती है,परन्तु जब यह सोमवार को पड़ती है तो इसका महत्व बढ़ जाता है। इस बार ग्रहों की अच्छी स्थिति, मृगशिरा नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे कई बड़े संयोग एक साथ बन रहे हैं। अतः इस दिन का अधिक से अधिक लाभ उठाएं इस दिन स्नान,दान- पुण्य व भगवान की कथाओं का श्रवण करें और इस दिन अधिक से अधिक भगवान “नाम का जप” अवश्य करें।

।। आचार्य धीरज “याज्ञिक” जी महाराज ।।

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