साहित्य

बनमाली वर्णिक छंद में हे विश्वेश

डॉ मंजु गुप्ता,

संसार में , तुम सोहे, निरांतक।

नागेंद्र हे, पट धारे , मृगांतक।।

धारे गला , अहिमाला , विशृंखल।

विश्वेश हे, मुझ को दो ,कृपा बल।

 

 

संवेदना , रचना में , चला चल।

पीना पड़े , मुझ को है , हलाहल।।

विज्ञेय हे , वृषवामी , रचे शिव।

योगेश हे, वसुधामा , सजे दिव।।

 

हो काव्य में , प्रभु गौरा , सदा स्वर।

बोलो सभी , ऋषि कर्ता ,कवि: हर।।

आनंद हो , सच भी हो ,कपर्दिन।

अव्यक्त हो , प्रभु धारे , मृगाजिन।।

धर्मांग हे , दुख का हो ,निवारण।

आलोक हे, गम का हो , विदारण।।

मैंने किया , मन तेरे, समर्पण।

मेरा सदा , पथ भी हो , प्रसर्पण।।

 

डॉ मंजु गुप्ता,

वाशी , नवी मुंबई।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!