साहित्य

महफ़िल

रिया राणावत 

महफ़िल लाख होती हैं

मज़ा एक में आता है

हसाते लोग हज़ार है

पर एक का कहा दिल छू जाता हैं

महफिल में उजाला बहुत होता हैं

पर एक सितारा चमक जाता हैं

महफ़िल सजी होती हैं

क्योंकि दोस्तो से मिलन हो जाता हैं

महफ़िल ही मिलने की हैं

पर दिल मिल जाते हैं

इतने भूले भटके

एक समान होके

महफ़िल में मिल जाते हैं

सुंदर सा सजाते हैं

महफ़िल को

यादगार बनाने को

बस यादें रह जाती हैं

अपने सितारों की

महफ़िल खत्म होने पर।।

 

– रिया राणावत

कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)

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